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ताना बाना  | 09.02.2010

भारत में बीटी बैंगन पर फ़िलहाल रोक

 

भारत ने कहा है कि जेनेटिक बैंगन की व्यवसायिक खेती तब तक नहीं की जाएगी जब तक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों के बारे में पर्याप्त अध्ययन न हो जाएं. लंबे समय से बीटी बैंगन का मुद्दा विवाद के दायरे में था.

 

अमेरिकी कंपनी मोनसांटो और भारतीय कंपनी माहीको की ओर से संयुक्त रूप से बीटी ब्रिंजल नामक इस जेनेटिक बैंगन का ईजाद किया गया था. अक्टूबर के महीने में सरकारी जेनेटिक इंजिनीयरिंग ऐप्रुवल कमेटी ने इसकी व्यवसायिक खेती के लिए अनुमति दे दी थी. कमेटी का कहना था कि इससे कीटनाशकों का कम प्रयोग करना पड़ेगा व पैदावार बढ़ेगी.

इसके बाद अनेक वैज्ञानिकों व नागरिक अधिकार संगठनों ने सरकार के इस निर्णय का व्यापक रूप से विरोध किया था.11 प्रदेश सरकारों ने घोषणा की थी कि वे अपने अपने प्रदेश में इसकी खेती नहीं होने देंगे.

मंगलवार को प्रेस के साथ एक मुलाक़ात के दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि बीटी ब्रिंजल की खेती की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक वैज्ञानिक शोध के परिणामों के ज़रिये आम लोगों और वैज्ञानिकों की चिंताएं दूर न हों. उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में जल्दबाज़ी की कोई ज़रूरत नहीं है और लोगों की भावनाएं इसके ख़िलाफ़ हैं. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बीटी ब्रिंजल पर पाबंदी नहीं लगाई जा रही है.

काई एशियाई देश उत्सुकता के साथ जेनेटिक ढंग से विकसित खाद्य पदार्थ की खेती के बारे में भारत के रुख़ का इंतज़ार कर रहे थे. भारत में अब तक सिर्फ़ जेनेटिक ढंग से विकसित कपास की खेती की अनुमति दी गई है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उ भट्टाचार्य

संपादन: प्रिया एसेलबोर्न 

 
 

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